लाख जमाने भर की डिग्रीयाँ हो हमारे पास , अपनों की आँखों से छलकते आँसू नहीं पढ़ पाये तो अनपढ़ है हम
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लाख जमाने भर की
डिग्रीयाँ हो हमारे पास,
अपनों की आँखों से छलकते आँसू
नहीं पढ़ पाये तो अनपढ़ है हम
प्रसंशा चाहे कितनी भी करो
किंतु "अपमान"बहुत ही सोच समझ कर करना चाहिए
क्योंकि"अपमान"वो ऋण है जिसे हर कोई अवसर मिलने पर "ब्याज"सहित चुकाता है
जब जल गंदा हो जाता है
तो उसे हिलाते नहीं
शांत छोड़ देते हैं ,धीरज
रखते है.......,
गंदगी अपने - आप नीचे
बैठ जाती है....
साफ जल अपने - आप
ऊपर आ जाता है.....
इसलिये जो धीरज रख
सकता है वह........
अपना इच्छित सब कुछ
पा सकता है.........
स्पीड ब्रेकर कितना भी बड़ा हो,
गति धीमी करने से
झटका नहीं लगता ।
उसी तरह
मुसीबत कितनी भी बड़ी हो
शांति से विचार करने पर
जीवन में झटके नही लगते ।
चलते रहिए।
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