राजस्थान पत्रिका का बहिष्कार करे संस्थांपक गुलाब कोठारी आरक्षण के खिलाफ है बार -बार आरक्षण को खत्म करने की बात करता है
SC/ ST / OBC
राजस्थान पत्रिका का बहिष्कार करे
संस्थांपक गुलाब कोठारी आरक्षण के खिलाफ है
बार -बार आरक्षण को खत्म करने की बात करता है
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| Rajasthan-Patrika |
Yes Iske Kabil Bhi Nahi Inki Photo Aapko Dikha Saku
प्रिय कोठारी जी राजस्थान पत्रिका में आज आपका आर्टिकल पढ़ा और आपका वो सर्वे भी । आरक्षण से देश मे सामाजिक वैमनस्य बढ़ा है और आर्थिक असमानता पैदा हुई है । कोठारी जी वास्तव में देश की बड़ी चिंता है आपको , इसीलिए आप बार बार चिंतित होते रहते हैं और जब भी आप चिंतित होते हैं तो आरक्षण पर एक लंबा लेख लिख देते हैं । आज गांधी जयंती पर आपको फिर से चिंता हुई , क्योकि ये चिंता करने की शैली शायद आपने गांधी जी से ही सीखी है । गांधी जी को भी हुई थी चिंता गोलमेज सम्मेलन के बाद। कोठारी जी आपको लगता है कि इस देश की सब समस्यायों की जड़ आरक्षण ही हैं । आरक्षण नही होता तो देश मे इतना सोहाद्र होता कि आप अपनी बेटी की शादी किसी दलित लड़के से करते लेकिन अफशोष आरक्षण ने वैमनस्य बढ़ा दिया ।
कोठारी जी आप बात कर रहे हो ना सामाजिक समरसता की । वो समरसता आपके पूर्वजो ने बहुत पहले सिन्धुघाटी के खण्डहरों में दफन कर दी थी । इस देश मे भी खूब था सोहाद्र , भाईचारा लेकिन जिस दिन से आप लोग ब्रह्मा के मुख से पैदा होने लगे थे ना उसी दिन सोहाद्रता , समरसता , भाईचारा सब खत्म हो गया था । भगवान ने तो इंसान बनाया था लेकिन आप ब्राह्मणों ने तो भगवान को बहोत पीछे छोड़ दिया । इंसान में भी कई वेराइटी बना दी । आप लोग ब्राह्मण .., आप सबसे श्रेष्ठ और बाकी पूरा देश अज्ञानी , नीच ,दुष्ट , पापी । आप बन गए सर्वशक्तिमान .., किसको नरक भेजना है किसको स्वर्ग , किस पर शनि चढ़ाना हैं और किसके घर मे मंगल लाना है , सब कुछ आपके हाथ में , तब आपको लगता था कि कितना भाईचारा है , कितनी सरसता है ।
लेकिन आरक्षण की वजह से वो वर्ग जिसे समाज की मुख्यधारा से बाहर धकेल दिया था, वो जब आज उनके बराबर बैठने लग गए तब कोठारी जी को अहसास हुआ कि ये तो सामाजिक भाईचारा बिगड़ रहा हैं ।
कोठारी जी आप ने कई दिनों से रट लगा रखी हैं कि आर्थिक आरक्षण ,आर्थिक आरक्षण । शायद आपको आरक्षण की परिभाषा ही नही पता ।
कोठारी जी आरक्षण की व्यस्था में आर्थिक शब्द का कही उल्लेख ही नही है । आपने अंत्योदय योजना की तरह आरक्षण को भी एक योजना समझ लिया है । आपने एक शब्द आर्थिक असमानता का यूज़ किया लेकिन शायद आपको सामाजिक असमानता की समझ नही है । आपको सामाजिक असमानता के बारे में जानना चाहिये ।
16 वी सताब्दी में जब अंग्रेज भारत आये थे उस समय आपके पूर्वजो ने देश मे ऊंच नीच के नाम पर जो मार काट मचा रखी थी ना उसे कहते हैं समाजिक असमानता । पढ़ाई लिखाई सिर्फ ब्रामणो के लिए हैं , ये कहकर किसी की भी जीभ काट दी जाती थी ना , वो थी सामाजिक असमानता । हर एक संसाधन पर हमारी बपौती है , ये कहकर जिनको गांव में घुसने से रोक दिया जाता था , वो थी सामाजिक असमानता ।
देश की आजादी के समय भारत मे एक ऐसा वर्ग था जिसने देश के अधिकतर संसाधनों पर अपना प्रभुत्व कर लिया था और दूसरी तरफ ऐसा वर्ग जिसके पास खाने के लिए रोटी तक ना थी ।
इसी सामाजिक असमानता को दूर करने के लिए संविधान में आरक्षण का प्रावधान किया गया ताकि देश की बहुत बड़ी आबादी जो पीछे छूट गयी है , उसे भी मुख्य धारा मे लाया जाए । क्योंकि संविधान सबको बराबर मानता हैं । संविधान की नजरों में न कोई ब्राह्मण है और न कोई शुद्र । न कोई ऊंचा हैं और न कोई नीचा, सब के सब भारतीय है । संविधान की इसी मंशा को पूरा करने के लिए ही भूमि सुधार कानून भी लाया गया लेकिन कानूनों को लागू करने वाले तो ब्राह्मण ही थे ना । उस समय देश के हर संसाधन को अगर प्रत्येक भारतीय में बराबर बराबर बांटा जाता तो , तो शायद आज तक संविधान की सामाजिक बराबरी की मंशा पूरी हो गयी होती । लेकिन आरक्षण से नोकरियो में प्रतिनिधित्व तो मिला लेकिन देश के संसाधनों में बिल्कुल हिस्सा नहीं मिला । इसी कारण भारत मे सामाजिक बराबरी अभी भी एक सपना है।
आज जब SC / ST / OBC वर्ग को नोकरियो में थोड़ा बहुत प्रतिनिधित्व मिला तो कोठारी जी कह रहे है कि आर्थिक असमानता फैल रही है ।अभी भी उच्च शिक्षा और न्यायपालिका में SC,ST,OBC की भागीदारी न के बराबर है और आप कह रहे हो कि आरक्षण खत्म करो । आज भी किसी दलित को घोड़ी पर चढ़ने मात्र पर मार दिया जाता है । किसी दलित लड़के को इसलिए मार दिया जाता क्योकि वो किसी ब्राह्मण लड़की से प्यार करने की हिम्मत कर लेता है ओर ये सब संविधान की समानता की मंशा के खिलाफ है । इसलिए जब तक संविधान की नजरों में सब बराबर नही हो जाते तब तक तो कोठारी जी आरक्षण सामाजिक आधार पर ही रहेगा
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चाहे आप कितने भी सर्वे कर लो ।कोठारी जी ये सर्वे के नाम पर झूठ मत फैलाओ ...पता नही कब कोनसा सर्वे उल्टा पड़ जाए । इसलिए हमारी तो ये ही राय हैं कि अपने अखबार के बारे में सोचो , देश के बारे में चिंता करने वाले ओर बहुत है । यदि आप फिर भी बाज नहीं आये तो हमारा आपका अखबार का बहिष्कार कर मंगवाना बंद कर देगा फिर आपका हश्र क्या होगा यह आप सोच लीजिए हम बहुजनों को इतना मजबूर मत करो कि हमसब मिलकर आपके अखबार न मंगवाने की खसम खाये।
दोस्तों इस पोस्ट को जितना हो सके अपने सभी दोस्तों को शेयर करे ताकि ये सुचना सब तक पहुंच सके ताकि ये फिर आरक्षण खत्म करने की बात तो अपना नाम लेने से डरे ।

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