Monday, June 25, 2018

आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते हो

आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते हो
जब भी मन में आये क्यों रुला देते हो
निगाहें बेरुखी हैं और तीखे हैं लफ्ज़

ये कैसी मोहब्बत हैं जो तुम मुझसे करते हो

मेरे बहते आंसुओ की कोई कदर नहीं
क्यों इस तरह नजरो से गिरा देते हो
क्या यही मौसम पसंद है तुम्हे जो,
सर्द रातो में आंसुओ की बारिश करवा देते हो


तीर दर्द का सा लगता है सीने में मेरे
जब कांपता देख भी तुम मुस्कुरा देते हो
लोग तो मुर्दे को भी सीने से लगा कर प्यार करते हैं
फिर क्यों मेरे करीब आकर तुम हर बार ज़ख्म नया देते हो


आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते हो
जब भी मन में आये क्यों रुला देते हो


By Lalchand Verma

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